मनुष्य कितना भी

“मंनुष्य कितना भी गोरा क्यों ना हो, परंत उसकी परछाई सदैव काली होती है…! “मैं श्रेष्ठ हूँ”  यह आत्मविश्वास है, लेकिन सिर्फ मैं ही श्रेष्ठ हूँ”  यह अहंकार है.”

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