जिन्दगी की हर सुबह

जिन्दगी की हर सुबह कुछ शर्ते लेके आती है. और जिन्दगी की हर शाम कुछ तर्जुबे देके जाती है मंजिल चाहे कितनी भी ऊँची क्यों न हो रास्ते हमेशा पैरों के नीचे होते हैं. जो निखर कर बिखर जाए वो “कर्तव्य” है और जो बिखर कर निखर जाए वो “व्यक्तित्व” है.

Continue Reading

सुबह की “चाय” और..

सुबह की “चाय” और बड़ों की “राय” समय-समय पर लेते रहना चाहिए. पानी के बिना, नदी बेकार है अतिथि के बिना, आँगन बेकार है। प्रेम न हो तो, सगे-सम्बन्धी बेकार है। पैसा न हो तो, पोकेट बेकार है। और जीवन में गुरु न हो तो जीवन बेकार है। इसलिए जीवन में “गुरु”जरुरी है। “गुरुर” नही ✍..

Continue Reading

अच्छा दिखने के लिये…

” अच्छा दिखने के लिये मत जिओ बल्कि अच्छा बनने के लिए जिओ जो झुक सकता है वह सारी दुनिया को झुका सकता है अगर बुरी आदत समय पर न बदली जाये, तो बुरी आदत *समय बदल देती है. “

Continue Reading

दुनिया का हर शौंक…

दुनिया का हर शौंक पाला नही जाता कांच के खिलौनों को उछाला नही जाता मेहनत करने से मुश्किल हो जाती है आसान क्योंकि हर काम तक़दीर पर टाला नही जाता।

Continue Reading